होम लोन कितना ले सकते हैं? अपना बजट बनाम बैंक की पात्रता

पेज अपडेट: 11 अक्टूबर 2026 · स्रोत जाँचे: 11 अक्टूबर 2026

"मुझे कितना होम लोन मिलेगा?" और "मैं कितना लोन आराम से चुका पाऊँगा?" — ये दो अलग सवाल हैं। पहले का जवाब बैंक अपने नियमों से देता है; दूसरे का जवाब आपके घर के बजट से निकलता है। यह गाइड दूसरे सवाल का हिसाब समझाती है और बताती है कि बैंक का जवाब उससे अलग क्यों हो सकता है।

दो अलग सवाल

अपना बजट (अफ़ोर्डेबिलिटी): ज़रूरी ख़र्च, बचत और इमरजेंसी फ़ंड के बाद हर महीने कितनी EMI बिना तनाव के चुक सकती है। यह आप तय करते हैं।

बैंक की पात्रता (एलिजिबिलिटी): बैंक आपकी आय, क्रेडिट रिकॉर्ड, उम्र, नौकरी और प्रॉपर्टी देखकर कितना लोन देने को तैयार है। यह बैंक तय करता है, और हर बैंक का तरीका अलग होता है। कोई वेबसाइट — यह भी — आपकी पात्रता या मंज़ूरी पक्की नहीं कर सकती।

बैंक जितना दे, उतना लेना ज़रूरी नहीं। सुरक्षित तरीका यह है कि आप अपने बजट की सीमा से नीचे रहें।

अपना बजट: हिसाब कैसे होता है

  1. सीमा चुनें: हाथ में आने वाली मासिक आय का कितना प्रतिशत सभी EMI पर जाए। यह कोई सरकारी नियम नहीं, आपका फ़ैसला है — मासिक बजट बनाकर देखें कि ज़रूरी ख़र्च और बचत के बाद कितना बचता है।
  2. चल रही EMI घटाएँ: जो बचता है, वही नई EMI की जगह है।
  3. मूलधन निकालें: उस EMI से चुनी दर और अवधि पर कितना मूलधन चुकता है — यह EMI का उल्टा हिसाब है: मूलधन = EMI × [1 − (1 + r)−n] ÷ r।

उदाहरण — ₹1 लाख महीना हाथ में, 40% सीमा, 8.5%, 20 साल

सीमा ₹40,000। कार लोन की EMI ₹10,000 पहले से है, इसलिए नई EMI की जगह ₹30,000। यह EMI 240 महीनों में लगभग ₹34.57 लाख मूलधन चुकाती है, और पूरी अवधि में लगभग ₹37,43,075 ब्याज जाता है।

चल रही EMI का असर

ऊपर वाले उदाहरण में कार लोन न होता, तो नई EMI की जगह ₹40,000 होती और अंदाज़ा लगभग ₹46.09 लाख — यानी ₹10,000 की चल रही EMI ने होम लोन की गुंजाइश लगभग ₹11.52 लाख कम कर दी। छोटी-सी EMI भी 20 साल के होम लोन के हिसाब में बड़ा फ़र्क़ डालती है, क्योंकि हर रुपया 240 महीनों तक गिना जाता है।

अगर चल रही EMI ही आपकी चुनी सीमा से ज़्यादा हो — जैसे ₹60,000 आय, 40% सीमा (₹24,000) और ₹30,000 की चल रही EMI — तो नई EMI की कोई जगह नहीं बचती; सीमा से ₹6,000 ज़्यादा पहले से जा रहा है। ऐसे में कैलकुलेटर कोई लोन नहीं दिखाता, नकारात्मक रकम भी नहीं।

दर और अवधि का असर

बैंक क्या-क्या देखता है

हर बैंक के अपने लिखित नियम होते हैं। आम तौर पर इन बातों पर ध्यान दिया जाता है:

लोन की पेशकश मिलने पर Key Facts Statement (KFS) ध्यान से पढ़ें। RBI के 2024 के सर्कुलर के अनुसार KFS में APR — ब्याज और बाक़ी सभी चार्ज मिलाकर क़र्ज़ की सालाना लागत — लिखी होती है, और KFS में न लिखी फ़ीस आपकी स्पष्ट सहमति के बिना नहीं ली जा सकती।

घर की पूरी लागत

लोन से घर की पूरी क़ीमत नहीं चुकती। अपनी रकम से चाहिए: डाउन पेमेंट (क़ीमत का जो हिस्सा लोन से नहीं आता), स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन (राज्य के नियम से), प्रोसेसिंग फ़ीस, क़ानूनी जाँच और बीमा जैसी लागत, और शिफ़्ट होने का ख़र्च। ये सब चुकाने के बाद भी इमरजेंसी फ़ंड बचा रहना चाहिए।

आम ग़लतियाँ

लेखक: start। SaralPaisa कोई वित्तीय सलाहकार, CA या SEBI-रजिस्टर्ड संस्था नहीं है; यह पेज शिक्षा के लिए है। हमारे बारे में · हम हिसाब कैसे करते हैं · डिस्क्लेमर