EMI कैलकुलेटर: लोन की मासिक किस्त कितनी बनेगी?
लोन की रकम, सालाना ब्याज दर और अवधि डालिए। नतीजे में मासिक EMI, कुल ब्याज और हर साल चुकने वाला मूलधन दिखेगा। यह कैलकुलेटर होम, कार, पर्सनल और एजुकेशन लोन, सब पर एक ही गणित से काम करता है।
EMI कैलकुलेटर
₹1,000 से ₹50 करोड़ तक।
0% से 50% तक। यह बैंक की बताई नाममात्र (nominal) दर है, फ़ीस मिलाकर बनी दर नहीं।
आपकी मासिक EMI
इस हिसाब की मान्यताएँ
- पूरी अवधि में ब्याज दर एक जैसी मानी गई है। फ़्लोटिंग रेट बदलने पर बैंक EMI या अवधि बदल देता है।
- ब्याज हर महीने बचे हुए मूलधन पर (सालाना दर ÷ 12) लगता है। हिसाब पूरी सटीकता से होता है और यहाँ रुपये में गोल दिखाया जाता है; आख़िरी किस्त में बचा पैसे-भर का फ़र्क़ समायोजित होता है ताकि बैलेंस ठीक शून्य हो। बैंक EMI को अपने नियम से गोल करते हैं, इसलिए कुछ रुपये का फ़र्क़ हो सकता है।
- प्रोसेसिंग फ़ीस, बीमा, GST और पहली EMI से पहले का "ब्रोकन पीरियड" ब्याज शामिल नहीं है। फ़ीस का असर देखने के लिए लोन तुलना टूल इस्तेमाल करें।
साल-दर-साल भुगतान
शुरुआती सालों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है; बाद में मूलधन तेज़ी से घटता है।
| साल | मूलधन चुकाया | ब्याज चुकाया | बाक़ी लोन |
|---|
EMI का फ़ॉर्मूला
EMI = P × r ÷ [1 − (1 + r)−n]
P = लोन की रकम, r = मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100), n = कुल महीने। दर शून्य हो, तो EMI = P ÷ n।
उदाहरण: ₹10 लाख का लोन, 9% सालाना ब्याज, 10 साल (120 महीने)। r = 0.0075, और EMI लगभग ₹12,668 बनती है। 10 साल में कुल ₹15,20,109 चुकाए जाते हैं, जिसमें ₹5,20,109 ब्याज है।
EMI कम करें या ब्याज? असली फ़ैसले
- ब्याज दर का छोटा फ़र्क़: ₹30 लाख के 20 साल के लोन पर 8.5% और 9% में कुल ब्याज का फ़र्क़ लगभग ₹2,29,700 है। ऊपर दर बदलकर अपने लोन पर देखें।
- लंबी अवधि: इसी लोन को 20 की जगह 25 साल करने से EMI ₹26,035 से घटकर ₹24,157 होती है, लेकिन कुल ब्याज लगभग ₹9,98,716 बढ़ जाता है।
- प्रीपेमेंट: बीच में अतिरिक्त रकम जमा करने से बाक़ी मूलधन और ब्याज दोनों घटते हैं। तारीख़ और रकम के साथ असर प्रीपेमेंट कैलकुलेटर में देखें। RBI के Pre-payment Charges on Loans Directions, 2025 के अनुसार, 1 जनवरी 2026 या उसके बाद मंज़ूर या रिन्यू हुए, व्यक्तियों के ग़ैर-व्यावसायिक फ़्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लिया जा सकता; बाक़ी लोन की शर्तें सैंक्शन लेटर, लोन एग्रीमेंट और KFS में देखें।
- दो ऑफ़र की तुलना: कम दर वाला ऑफ़र भी ज़्यादा फ़ीस के कारण महँगा पड़ सकता है। लोन तुलना टूल फ़ीस जोड़कर कुल ख़र्च दिखाता है।
यह नतीजा कैसे पढ़ें
- किसके काम का: होम, कार, पर्सनल या एजुकेशन लोन लेने से पहले, या चलते लोन की किस्त जाँचने के लिए — जब दर पूरी अवधि एक-सी मानी जा सके।
- EMI बैंक की बताई नाममात्र दर पर है। फ़ीस मिलाकर असली लागत लोन तुलना में दिखती है, और KFS में लिखी APR में।
- कुल ब्याज बड़ा लगे, तो अवधि घटाकर या ऊपर “तुलना” में आधार बनाकर देखें; बीच में प्रीपेमेंट का असर प्रीपेमेंट कैलकुलेटर में।
- शामिल नहीं: प्रोसेसिंग फ़ीस, बीमा, GST, पहली EMI से पहले का ब्याज, और फ़्लोटिंग दर का बदलना।
आम ग़लतियाँ
- “फ़्लैट” दर सीधे डाल देना। कुछ ऑफ़र में ब्याज शुरुआती रकम पर “फ़्लैट” बताया जाता है; यह कैलकुलेटर घटते बैलेंस पर चलता है, इसलिए फ़्लैट दर डालने से EMI असल से कम दिखेगी। बैंक से घटते बैलेंस वाली दर या APR पूछें।
- मासिक दर को सालाना समझना। यहाँ सालाना दर डालें।
- सिर्फ़ EMI देखकर अवधि चुनना। लंबी अवधि में EMI घटती है, पर कुल ब्याज बढ़ता है।
- बजट देखे बिना सबसे बड़ी EMI चुन लेना। पहले अफ़ोर्डेबिलिटी देखें; अंतर समझने के लिए अपना बजट बनाम बैंक की पात्रता पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या EMI में प्रोसेसिंग फ़ीस शामिल होती है?
नहीं। प्रोसेसिंग फ़ीस, बीमा और दूसरे चार्ज अलग लगते हैं। बैंक से कुल लागत का लिखित ब्योरा माँगें।
फ़्लोटिंग रेट पर EMI बदलती है?
हाँ। दर बदलने पर बैंक या तो EMI बदलता है या अवधि। यह कैलकुलेटर आज की दर के हिसाब से अनुमान देता है।
बैंक की EMI इस कैलकुलेटर से कुछ रुपये अलग क्यों है?
बैंक EMI को अपने नियम से गोल करते हैं, दिनों के हिसाब से ब्याज गिन सकते हैं और पहली EMI से पहले का ब्याज अलग लेते हैं। इसलिए कुछ रुपये का फ़र्क़ सामान्य है।
स्रोत और जाँच
नीचे वे स्रोत हैं जिन्हें इस पेज के नियमों/दरों के लिए खोलकर मिलाया गया। "जाँचा" तारीख़ वह दिन है जब स्रोत खोला गया; पेज की "अपडेट" तारीख़ अलग है।
- RBI (Pre-payment Charges on Loans) Directions, 2025 (RBI/2025-26/64, 2 जुलाई 2025) — 1 जनवरी 2026 या बाद में मंज़ूर/रिन्यू हुए, व्यक्तियों को ग़ैर-व्यावसायिक काम के लिए दिए फ़्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं (पैरा 5(i)); कोई लॉक-इन नहीं (5(iii)); बाक़ी मामलों में लेंडर की मंज़ूर पॉलिसी (6); चार्ज लगेगा या नहीं, यह सैंक्शन लेटर, एग्रीमेंट और KFS में लिखा होना चाहिए (9)। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 11 अक्टूबर 2026