महँगाई कैलकुलेटर: कुछ साल बाद वही चीज़ कितने की होगी?
जो चीज़ आज ₹5 लाख की है, वह 10 साल बाद कितने की होगी? और आज के ₹1 लाख की ख़रीदने की ताक़त तब कितनी रह जाएगी? महँगाई की दर आप ख़ुद चुनिए — टूल दोनों तरफ़ से हिसाब दिखाता है।
महँगाई कैलकुलेटर
1 से 60 साल तक।
यह आपकी मान्यता है, कोई सरकारी आँकड़ा नहीं। पढ़ाई या इलाज जैसी चीज़ों के दाम अक्सर औसत से अलग रफ़्तार से बढ़ते हैं। −5% से 25% तक; नकारात्मक दर का मतलब है दाम घटना।
एक ही चीज़ को दो मान्यताओं पर देखने के लिए। ख़ाली छोड़ें तो तुलना नहीं दिखेगी।
आगे की अनुमानित क़ीमत
इस हिसाब की मान्यताएँ
- हर साल एक जैसी दर, सालाना चक्रवृद्धि: आगे की क़ीमत = आज की क़ीमत × (1 + दर)साल।
- ख़रीदने की ताक़त = आज की रकम ÷ (1 + दर)साल — यानी तब ये रुपये आज के कितने रुपयों जितना सामान ख़रीद पाएँगे।
- दर आपकी मान्यता है। यह टूल कोई सरकारी महँगाई आँकड़ा या भविष्य का अनुमान नहीं देता।
साल-दर-साल
| साल | अनुमानित क़ीमत | आज के पैसे की ताक़त | दूसरी दर पर क़ीमत |
|---|
उदाहरण: बच्चे की पढ़ाई की फ़ीस
उदाहरण — काल्पनिक संख्याएँ
जिस कोर्स की कुल फ़ीस आज ₹5 लाख है, वह 10 साल बाद 8% सालाना बढ़त पर लगभग ₹10,79,462 की होगी। 6% मानें तो ₹8,95,424। सिर्फ़ मान्यता के 2 प्रतिशत अंक के फ़र्क़ से लक्ष्य ₹1,84,038 बदल जाता है — इसलिए लंबे लक्ष्यों में दो दरों पर हिसाब देखना काम आता है।
दूसरी तरफ़ से: 6% महँगाई पर आज के ₹1 लाख की ताक़त 10 साल बाद आज के लगभग ₹55,839 जितनी रह जाती है, और 20 साल बाद ₹31,180। यही बात उलटकर: आज ₹1 लाख की चीज़ 10 साल बाद ₹1,79,085 की होगी (79.1% ज़्यादा)। घर का ₹30,000 का मासिक ख़र्च 15 साल बाद 6% पर लगभग ₹71,897 होगा।
दाम घटने का परिदृश्य: −1% डालें तो ₹1 लाख की चीज़ 5 साल बाद ₹95,099 की दिखेगी। कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान में ऐसा होता है, पर पूरे घर-ख़र्च में लंबे समय तक कम ही।
आम ग़लतियाँ
- हर चीज़ के लिए एक ही दर: पढ़ाई, इलाज, किराया और रोज़ का सामान अलग रफ़्तार से बढ़ते हैं। जिस लक्ष्य का हिसाब है, उसकी दर सोचें।
- बचत की बढ़त को असली बढ़त मानना: अगर FD 7% दे और महँगाई 6% हो, तो ख़रीदने की ताक़त सिर्फ़ लगभग 1% बढ़ती है (टैक्स से पहले)। एकमुश्त कैलकुलेटर दोनों साथ दिखाता है।
- आज की क़ीमत को लक्ष्य बनाना: पहले आगे की क़ीमत निकालें, फिर बचत लक्ष्य कैलकुलेटर में डालें।
यह नतीजा कैसे पढ़ें
- किसके काम का: किसी भविष्य के ख़र्च (पढ़ाई, शादी, घर की मरम्मत) का आज की क़ीमत से अंदाज़ा, या यह देखने के लिए कि आज की रकम की ताक़त कितनी घटेगी।
- दूसरी दर डालकर दोनों नतीजे साथ देखें — महँगाई की दर का छोटा फ़र्क़ भी लंबे समय में बड़ा असर डालता है।
- शामिल नहीं: अलग-अलग चीज़ों की अलग महँगाई। पढ़ाई या इलाज की महँगाई आम दर से अलग हो सकती है; दर पूरी अवधि एक-सी मानी गई है।
सवाल-जवाब
कौन-सी दर डालूँ?
कोई एक सही दर नहीं। लोग अक्सर पिछले कुछ सालों की औसत महँगाई या अपनी ख़र्च-श्रेणी के अनुभव से अंदाज़ा लगाते हैं, फिर एक कम और एक ज़्यादा दर पर तुलना देखते हैं। यह टूल कोई सरकारी आँकड़ा नहीं दिखाता।
“ख़रीदने की ताक़त” का मतलब?
अगर आपके पास आज ₹1 लाख नक़द रखे रहें, तो कुछ साल बाद उनसे उतना सामान नहीं आएगा जितना आज आता है। यह संख्या बताती है कि वे तब आज के कितने रुपयों जितना सामान ख़रीद पाएँगे।