मासिक बजट प्लानर: हर महीने कितना बचता है?
हाथ में आने वाली आय और अपने ख़र्च लिखिए — जो रकम साल में एक बार आती या जाती है, उसे “हर साल” चुनकर वैसे ही लिखें; टूल उसे महीने में बाँट देगा। हर ख़र्च को श्रेणी दीजिए, ताकि दिखे कि पैसा कहाँ जा रहा है। कोई बैंक या ऐप जोड़ने की ज़रूरत नहीं।
मासिक बजट प्लानर
हर महीने बचने वाली रकम
| श्रेणी | हर महीने | आय का % |
|---|
इस हिसाब की मान्यताएँ
- “हर साल” वाली रकम ÷ 12 = महीने का हिस्सा; “हर महीने” वाली रकम × 12 = साल का जोड़। गोलाई सिर्फ़ दिखाने में होती है।
- बचा हुआ = आय − (ज़रूरी + पसंद + EMI + तय बचत)। तय बचत (जैसे SIP) को ख़र्च की तरह घटाया जाता है, ताकि “बचा हुआ” वह रकम दिखे जो किसी काम के लिए तय नहीं है।
- आय टैक्स और PF कटने के बाद की (हाथ में आने वाली) मानी गई है। कितनी कटेगी, इसके लिए इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर देखें।
- आपकी सूची इसी पेज में रहती है। यह अपने-आप कहीं सेव नहीं होती; “प्लान सेव करें” दबाने पर ही इसी ब्राउज़र में सेव होती है।
हर मद: महीने और साल का हिसाब
| मद | श्रेणी | हर महीने | हर साल |
|---|
उदाहरण: चार लोगों का परिवार
उदाहरण — काल्पनिक परिवार
हाथ में सैलरी ₹65,000 महीना और ₹60,000 सालाना बोनस — यानी आय ₹70,000 महीना (बोनस का मासिक हिस्सा ₹5,000)। ख़र्च:
| मद | श्रेणी | हर महीने | हर साल |
|---|---|---|---|
| किराया | ज़रूरी | ₹18,000 | ₹2,16,000 |
| राशन | ज़रूरी | ₹9,000 | ₹1,08,000 |
| बिजली-पानी-फ़ोन | ज़रूरी | ₹3,500 | ₹42,000 |
| बच्चों की फ़ीस | ज़रूरी | ₹5,000 | ₹60,000 |
| स्वास्थ्य बीमा | ज़रूरी | ₹2,000 | ₹24,000 |
| बाइक की EMI | EMI/क़र्ज़ | ₹6,000 | ₹72,000 |
| बाहर खाना, OTT | पसंद का | ₹4,500 | ₹54,000 |
| कपड़े, ख़रीदारी | पसंद का | ₹3,000 | ₹36,000 |
| SIP | बचत/निवेश | ₹8,000 | ₹96,000 |
कुल ख़र्च और तय बचत ₹59,000 महीना, यानी हर महीने ₹11,000 बचता है (साल में ₹1,32,000)। ज़रूरी ख़र्च ₹37,500 — आय का 54%; पसंद वाले ख़र्च ₹7,500 (11%)।
एक मान्यता बदलकर देखें: बोनस को महीने की आय में न गिनें, तो बचा हुआ सिर्फ़ ₹6,000 रह जाता है। बोनस साल में एक बार आता है, इसलिए कई परिवार उसे रोज़ के ख़र्च में नहीं, सालाना ख़र्च (बीमा, फ़ीस) या किसी लक्ष्य में लगाते हैं। वैसे ही ₹24,000 का सालाना बीमा महीने में सिर्फ़ ₹2,000 दिखता है, पर वह एक बार में चुकाना होता है।
आम ग़लतियाँ
- सालाना ख़र्च भूलना: बीमा, स्कूल की सालाना फ़ीस, गाड़ी की सर्विस — “हर साल” चुनकर ज़रूर लिखें, वरना हर महीने का बचा हुआ असल से ज़्यादा दिखेगा।
- ग्रॉस सैलरी लिखना: आय वही लिखें जो खाते में आती है।
- छोटे ख़र्च छोड़ देना: रोज़ के छोटे ख़र्च महीने में बड़ी रकम बनते हैं। एक महीने का बैंक स्टेटमेंट देखकर लिखें।
- बचत को आख़िर में रखना: SIP या RD को “बचत/निवेश” श्रेणी में ख़र्च की तरह लिखने से वह पहले तय हो जाती है।
यह नतीजा कैसे पढ़ें
- किसके काम का: घर के महीने के हिसाब के लिए — ख़ासकर नई EMI, किराये या बचत का फ़ैसला करने से पहले।
- बचत या कमी = आय − सभी ख़र्च। श्रेणी वाली तालिका बताती है कि सबसे बड़ा हिस्सा कहाँ जा रहा है; कोई तय “सही” प्रतिशत यहाँ नहीं थोपा जाता।
- शामिल नहीं: अनियमित आय का उतार-चढ़ाव और क्रेडिट कार्ड का पुराना बकाया — उसका हिसाब कार्ड रीपेमेंट टूल में। आय हाथ में आने वाली ही लिखें।
सवाल-जवाब
क्या कोई “सही” प्रतिशत है, जैसे 50-30-20?
ऐसे नियम सिर्फ़ शुरुआती अंदाज़ा देते हैं; शहर, किराया और परिवार के हिसाब से असली संख्या बहुत अलग हो सकती है। यह टूल कोई प्रतिशत तय नहीं करता — यह दिखाता है कि आपका पैसा अभी कहाँ जा रहा है, ताकि आप ख़ुद तय करें।
मेरी आय और ख़र्च कहाँ जाते हैं?
कहीं नहीं। सारा हिसाब इसी पेज में होता है। CSV भी आपके फ़ोन पर ही बनती है। “प्लान सेव करें” दबाने पर ही सूची इसी ब्राउज़र में सेव होती है, और “मेरे प्लान” पेज से हटाई जा सकती है।
कितनी पंक्तियाँ जोड़ सकते हैं?
आय की 20 और ख़र्च की 40 पंक्तियाँ। हर रकम ₹0 से ₹100 करोड़ के बीच होनी चाहिए।