लोन तुलना: कौन-सा ऑफ़र असल में सस्ता है?
एक बैंक कम ब्याज दर बताता है, दूसरा कम प्रोसेसिंग फ़ीस। दोनों ऑफ़र नीचे डालिए। टूल हर ऑफ़र की EMI, कुल ब्याज, फ़ीस और कुल ख़र्च (सारी EMI + फ़ीस) साथ-साथ दिखाता है, और फ़ीस जोड़कर एक असरदार सालाना दर भी निकालता है।
लोन तुलना कैलकुलेटर
दोनों ऑफ़र साथ-साथ
| ऑफ़र A | ऑफ़र B |
|---|
इस तुलना की मान्यताएँ
- दोनों लोन की दर पूरी अवधि में स्थिर मानी गई है; EMI का हिसाब EMI कैलकुलेटर वाले इंजन से ही होता है।
- कुल ख़र्च = सारी किस्तें + एकमुश्त फ़ीस। इसमें बीमा, देर से भुगतान का जुर्माना, ब्रोकन-पीरियड ब्याज और भविष्य में दर बदलने का असर शामिल नहीं।
- फ़ीस सहित असरदार दर: मान लिया गया है कि लोन मिलते ही फ़ीस कटती है, यानी आपके हाथ में (रकम − फ़ीस) आती है और आप पूरी EMI चुकाते हैं। इस नक़दी-प्रवाह का IRR × 12 दिखाया गया है। यह किसी नियामक परिभाषा वाला APR नहीं है; बैंक के दस्तावेज़ों में दिया APR अलग तरीके से गिना जा सकता है।
- नतीजे का आधार: फ़ीस सहित असरदार दर हर हाल में तुलना का आधार है, क्योंकि वह रकम और अवधि पर निर्भर नहीं। कुल ख़र्च (रुपयों का जोड़) से फ़ैसला सिर्फ़ तब दिखाया जाता है जब दोनों ऑफ़र की रकम और अवधि एक जैसी हो — कम रकम वाला लोन कम रुपये लौटाता है, पर इससे वह सस्ता नहीं हो जाता। दोनों आधार अलग नतीजा दें, तो दोनों दिखाए जाते हैं। कोई दर निकल न सके, तो उस आधार पर कोई फ़ैसला नहीं दिखाया जाता।
उदाहरण: कम दर बनाम कम फ़ीस
₹5 लाख का पर्सनल लोन, 5 साल। ऑफ़र A: 10.5% दर, ₹2,500 फ़ीस। ऑफ़र B: 10.25% दर, ₹15,000 फ़ीस। (यही संख्याएँ ऊपर पहले से भरी हैं।)
| ऑफ़र A | ऑफ़र B | |
|---|---|---|
| EMI | ₹10,747 | ₹10,685 |
| कुल ब्याज | ₹1,44,817 | ₹1,41,108 |
| कुल ख़र्च (EMI + फ़ीस) | ₹6,47,317 | ₹6,56,108 |
| फ़ीस सहित असरदार दर | 10.72% | 11.58% |
B की दर कम होने से उसकी EMI और ब्याज थोड़े कम हैं, लेकिन ज़्यादा फ़ीस के कारण कुल ख़र्च में ऑफ़र A लगभग ₹8,791 सस्ता है। B तभी बराबरी पर आता जब उसकी फ़ीस लगभग ₹6,209 होती।
तुलना करते समय किन बातों पर ध्यान दें
- अवधि अलग हो, तो कुल ख़र्च भ्रामक हो सकता है: लंबे लोन की EMI कम होती है पर कुल ब्याज ज़्यादा। ऐसे में फ़ीस सहित असरदार दर बेहतर तुलना है, क्योंकि वह समय के साथ पैसे की क़ीमत भी गिनती है।
- प्रीपेमेंट की योजना: अगर आप लोन जल्दी चुकाने वाले हैं, तो एकमुश्त फ़ीस का बोझ कम महीनों पर बँटता है और ऊँची फ़ीस वाला ऑफ़र और महँगा पड़ता है। असर प्रीपेमेंट कैलकुलेटर में देखें।
- फ़्लोटिंग बनाम फ़िक्स्ड: यह टूल दोनों को स्थिर दर पर गिनता है। फ़्लोटिंग रेट आगे बढ़-घट सकती है; फ़िक्स्ड रेट वाले लोन पर प्रीपेमेंट शर्तें अलग हो सकती हैं।
- लिखित ब्योरा माँगें: बैंक से फ़ीस, बीमा और कुल लागत का लिखित ब्योरा माँगें (कई लोन में इसे Key Facts Statement कहा जाता है)। बीमा अनिवार्य बताया जाए, तो उसकी लागत भी फ़ीस में जोड़कर दोबारा देखें।
यह नतीजा कैसे पढ़ें
- किसके काम का: जब दो बैंकों या संस्थाओं के लोन ऑफ़र हाथ में हों, जिनकी दर, फ़ीस या अवधि अलग है।
- फ़ीस सहित असरदार दर कम होने का मतलब है कि आज मिली रकम के मुक़ाबले EMI का बोझ कम है। रकम और अवधि बराबर हों, तो कुल ख़र्च भी मिलाया जाता है। लोन जल्दी बंद करने का इरादा हो, तो फ़ैसला पलट सकता है — फ़ीस और प्रीपेमेंट गाइड का उदाहरण देखें।
- शामिल नहीं: बीमा, फ़ीस पर GST का समय, पहली EMI से पहले का ब्याज और प्रीपेमेंट। यह RBI की APR नहीं है; दोनों ऑफ़र की KFS में APR ज़रूर देखें।
आम ग़लतियाँ
- सिर्फ़ ब्याज दर से तुलना। फ़ीस आज चुकती है और कम दर का फ़ायदा सालों में मिलता है।
- अलग रकम या अवधि वाले ऑफ़र का कुल ख़र्च सीधे मिलाना। छोटा लोन कम रुपये चुकाएगा ही; ऐसे में असरदार दर देखें।
- KFS में लिखी शर्तें न पढ़ना। RBI के 2024 के सर्कुलर के अनुसार KFS में न लिखी फ़ीस आपकी स्पष्ट सहमति के बिना नहीं ली जा सकती।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
"फ़ीस सहित असरदार दर" और बैंक का APR एक ही है?
ज़रूरी नहीं। यहाँ सिर्फ़ एकमुश्त फ़ीस को लोन मिलते समय कटा हुआ मानकर दर निकाली गई है। APR में बीमा या दूसरे चार्ज भी हो सकते हैं और गणना का तरीका अलग हो सकता है।
दोनों ऑफ़र की रकम अलग हो तो?
टूल हिसाब तो दिखाएगा, लेकिन कुल ख़र्च की सीधी तुलना तब बेमानी है। एक जैसी रकम डालकर तुलना करें।
स्रोत और जाँच
नीचे वे स्रोत हैं जिन्हें इस पेज के नियमों/दरों के लिए खोलकर मिलाया गया। "जाँचा" तारीख़ वह दिन है जब स्रोत खोला गया; पेज की "अपडेट" तारीख़ अलग है।
- RBI: Key Facts Statement (KFS) for Loans & Advances (RBI/2024-25/18, 15 अप्रैल 2024) — APR = ब्याज दर और बाक़ी सभी चार्ज मिलाकर क़र्ज़ की सालाना लागत; KFS में न लिखी फ़ीस बिना स्पष्ट सहमति के नहीं ली जा सकती; क्रेडिट कार्ड इस सर्कुलर से बाहर; 1 अक्टूबर 2024 या बाद में मंज़ूर रिटेल/MSME टर्म लोन। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 11 अक्टूबर 2026