इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर: CTC से हर महीने कितना मिलेगा?
ऑफ़र लेटर का CTC हर महीने खाते में नहीं आता। उसमें से एम्प्लॉयर का PF और ग्रेच्युटी निकलते हैं, फिर आपका PF, प्रोफ़ेशनल टैक्स और इनकम टैक्स कटता है। यह सरल पेरोल अनुमान आपकी कंपनी के ढाँचे (बेसिक का हिस्सा, PF का तरीका) के आधार पर हिसाब लगाता है; यह किसी क़ानून के पालन की जाँच नहीं है।
इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर
परफ़ॉर्मेंस बोनस, ESOP और रीइंबर्समेंट निकालकर। यह अनुमान निवासी कर्मचारी और ₹50 लाख तक की टैक्सेबल आय के लिए है।
10% से 100%। अपनी सैलरी स्लिप से देखें। यह आपकी कंपनी का ढाँचा है; नीचे "लेबर कोड" वाला हिस्सा पढ़ें।
राज्य और सैलरी के हिसाब से बदलता है; अपनी सैलरी स्लिप देखें।
आपका PF अपने आप जुड़ता है; दोनों मिलाकर ₹1,50,000 की एक ही सीमा (धारा 123) लगती है।
हर महीने हाथ में
इस अनुमान की मान्यताएँ
- CTC = ग्रॉस सैलरी + एम्प्लॉयर PF + (अगर शामिल हो) ग्रेच्युटी। कई कंपनियाँ इंश्योरेंस, मील कार्ड, NPS या बोनस भी CTC में रखती हैं — वे यहाँ नहीं गिने गए।
- PF "बेसिक + DA" के 12% पर (या ₹15,000/महीने की सीमा पर); एम्प्लॉयर का हिस्सा भी उतना ही। एम्प्लॉयर के रिटायरमेंट-योगदान पर लगने वाली टैक्स-सीमा जैसी बारीकियाँ नहीं गिनी गईं।
- ग्रेच्युटी का प्रावधान बेसिक × 15/26 ÷ 12 (≈ 4.81%) माना गया — यह कंपनियों का आम तरीका है, क़ानूनी अनिवार्यता नहीं।
- इनकम टैक्स इनकम टैक्स कैलकुलेटर वाले इंजन से: निवासी, सिर्फ़ यह सैलरी, टैक्स ईयर 2026-27 के नियम। पुराने रिजीम में प्रोफ़ेशनल टैक्स और HRA छूट घटते हैं; नए में नहीं।
3 लाख से 30 लाख CTC पर अनुमानित इन-हैंड
मान्यताएँ: बेसिक CTC का 50%, पूरी बेसिक पर PF, ग्रेच्युटी CTC में, प्रोफ़ेशनल टैक्स ₹2,400/साल, नया रिजीम, कोई और आय नहीं।
| सालाना CTC | सालाना इनकम टैक्स | मासिक इन-हैंड |
|---|---|---|
| ₹3,00,000 | ₹0 | ₹21,199 |
| ₹5,00,000 | ₹0 | ₹35,465 |
| ₹6,00,000 | ₹0 | ₹42,598 |
| ₹8,00,000 | ₹0 | ₹56,864 |
| ₹10,00,000 | ₹0 | ₹71,130 |
| ₹12,00,000 | ₹0 | ₹85,396 |
| ₹15,00,000 | ₹77,835 | ₹1,00,309 |
| ₹18,00,000 | ₹1,20,702 | ₹1,18,136 |
| ₹20,00,000 | ₹1,57,440 | ₹1,29,340 |
| ₹25,00,000 | ₹2,63,875 | ₹1,56,136 |
| ₹30,00,000 | ₹3,97,140 | ₹1,80,695 |
लेबर कोड: "वेतन" का असली नियम
श्रम मंत्रालय की FAQ (जनवरी 2026) के अनुसार लेबर कोड 21 नवंबर 2025 से लागू (enforce) हुए। कई पुराने नियम तब तक चलते हैं जब तक नए नियम अंतिम रूप से अधिसूचित न हों, इसलिए आपकी कंपनी का बदलाव धीरे-धीरे दिख सकता है।
- "वेतन" (wages) में: बेसिक पे, महँगाई भत्ता (DA) और रिटेनिंग अलाउंस। परफ़ॉर्मेंस इंसेंटिव, ESOP, वेरिएबल हिस्सा और रीइंबर्समेंट वेतन नहीं माने जाते।
- 50% वाला नियम: यह "बेसिक CTC का 50% होना चाहिए" नहीं है। FAQ के शब्दों में, अगर भत्ते और लाभ मिलाकर (ग्रेच्युटी और छँटनी मुआवज़ा छोड़कर) कुल पारिश्रमिक के 50% से ज़्यादा हों, तो ज़्यादा वाली रकम "वेतन" में जोड़ी जाती है — PF, ग्रेच्युटी जैसे हिसाबों के लिए।
- आप पर असर: जिन कंपनियों में बेसिक कम रखा गया था, वहाँ "वेतन" बढ़ने से PF/ग्रेच्युटी बढ़ सकते हैं और टेक-होम थोड़ा घट सकता है। अगर PF ₹15,000 की सीमा पर कटता है, तो PF पर असर सीमित रहता है।
- फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी: FAQ के अनुसार अनुबंध पूरा होने पर ग्रेच्युटी मिलती है (5 साल की शर्त के बिना, अनुपात में)।
इस कैलकुलेटर में "बेसिक + DA का %" आपकी कंपनी का ढाँचा है। ₹12 लाख CTC पर बेसिक 40% रखने से मासिक इन-हैंड लगभग ₹88,277 और 50% रखने से ₹85,396 आता है — यानी लगभग ₹2,881 का फ़र्क़ (पूरी बेसिक पर PF मानकर)।
PF: पूरी बेसिक पर या ₹15,000 पर?
PF की अनिवार्य वेतन-सीमा अभी ₹15,000 महीना है; इसे ₹25,000 करने का प्रस्ताव ख़बरों में है, पर अधिसूचना नहीं आई (जाँचा: 8 अक्टूबर 2026)। कई कंपनियाँ पूरी बेसिक पर PF काटती हैं, कई सिर्फ़ सीमा पर। ₹12 लाख CTC पर पूरी बेसिक पर PF से इन-हैंड लगभग ₹85,396 और सीमा पर लगभग ₹93,796 महीना बनता है। PF का पैसा आपका ही है — वह रिटायरमेंट या नियमों के अनुसार निकासी पर मिलता है।
इन-हैंड बढ़ाने के समझदार तरीके
- सही रिजीम: अपनी असली कटौतियों के साथ दोनों रिजीम की तुलना करें और साल की शुरुआत में एम्प्लॉयर को बताएँ।
- CTC का ढाँचा समझें: HR से पूछें कि कौन-से हिस्से वेतन में गिने जाते हैं, PF किस रकम पर कटता है, और कौन-से भत्ते टैक्स-फ़्री हैं।
- VPF: अपनी मर्ज़ी से ज़्यादा PF कटवाने से टेक-होम घटता है, बचत बढ़ती है — यह इन-हैंड बढ़ाने का नहीं, बचत का तरीका है।
यह नतीजा कैसे पढ़ें
- किसके काम का: ऑफ़र लेटर या सैलरी बदलने पर हर महीने खाते में आने वाली रकम का अनुमान देखने के लिए।
- नतीजा CTC में से एम्प्लॉयर का PF और (अगर CTC में है तो) ग्रेच्युटी हटाकर, फिर आपका PF, प्रोफ़ेशनल टैक्स और टैक्स ईयर 2026-27 का अनुमानित इनकम टैक्स घटाकर बनता है।
- शामिल नहीं: बोनस या वैरिएबल पे कब मिलेगा, पुराने रिजीम में HRA जैसी छूट (उसके लिए HRA कैलकुलेटर), कंपनी की दूसरी कटौतियाँ और आपकी EMI।
आम ग़लतियाँ
- वैरिएबल या परफ़ॉर्मेंस बोनस को हर महीने की सैलरी मानना। वह साल में एक-दो बार और शर्तों के साथ आता है।
- PF का तरीका पूछे बिना हिसाब। पूरी बेसिक पर 12% और ₹15,000 की सीमा पर 12% में हर महीने का फ़र्क़ बड़ा हो सकता है; ऊपर का PF वाला हिस्सा देखें।
- इन-हैंड से सीधे बड़ी EMI तय करना। पहले मासिक बजट और होम लोन अफ़ोर्डेबिलिटी देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
12 लाख CTC पर हर महीने कितना मिलेगा?
ऊपर वाली मान्यताओं में लगभग ₹85,396 (PF ₹15,000 सीमा पर कटे तो लगभग ₹93,796)। आपकी कंपनी का ढाँचा अलग हो, तो ऊपर अपनी संख्याएँ डालें।
प्रोफ़ेशनल टैक्स हर राज्य में लगता है?
नहीं। कई राज्यों में लगता है, कई में नहीं; संविधान के अनुसार सालाना ₹2,500 से ज़्यादा नहीं हो सकता। अपनी सैलरी स्लिप देखें।
स्रोत और जाँच
नीचे वे स्रोत हैं जिन्हें इस पेज के नियमों/दरों के लिए खोलकर मिलाया गया। "जाँचा" तारीख़ वह दिन है जब स्रोत खोला गया; पेज की "अपडेट" तारीख़ अलग है।
- श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय: लेबर कोड FAQs (जनवरी 2026) — 21 नवंबर 2025 लागू होने की तारीख़; 'वेतन' की परिभाषा; 50% वाला नियम; फ़िक्स्ड-टर्म ग्रेच्युटी। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- SGCMS: EPF वेतन सीमा ₹25,000 — क्या तय हुआ, क्या नहीं — ₹15,000 की सीमा अभी लागू; ₹25,000 का प्रस्ताव अधिसूचित नहीं। द्वितीयक स्रोत — प्राथमिक पर अलग से नहीं जाँचा जाँचा: 8 अक्टूबर 2026
- CalcGuru: राज्य-वार प्रोफ़ेशनल टैक्स — ₹2,500 सालाना संवैधानिक सीमा; राज्य-वार दरें — अपने एम्प्लॉयर से पुष्टि करें। द्वितीयक स्रोत — प्राथमिक पर अलग से नहीं जाँचा जाँचा: 8 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 202 (नया टैक्स रिजीम, स्लैब) — नए रिजीम के स्लैब; धारा 202(4) से बाहर निकलने का विकल्प (बिना कारोबार वाली आय पर रिटर्न के साथ); धारा 202(2)(a)(i): नए रिजीम में Schedule III (Table: Sl. No. 5, 6, 7, 8, 11, 17) की छूट नहीं — Sl. No. 11 HRA वाला क्रम है, यह Rule 279 के शीर्षक से मिलाया गया। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 11 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 19 (सैलरी से कटौतियाँ) — स्टैंडर्ड डिडक्शन: धारा 202(1) (नया रिजीम) में ₹75,000, बाक़ी मामलों में ₹50,000 — दोनों में सैलरी से ज़्यादा नहीं। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 156 (रिबेट) — ₹12,500 (₹5 लाख तक), नए रिजीम में ₹60,000 (₹12 लाख तक) और मार्जिनल रिलीफ़। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 123 (पहले 80C) — ₹1,50,000 की सीमा; Schedule XV की पूरी सूची इस पेज पर नहीं खुली। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026