HRA छूट कैलकुलेटर: किराये पर कितना HRA टैक्स-फ़्री होगा?
अगर आपकी सैलरी में HRA (मकान किराया भत्ता) मिलता है और आप किराये के घर में रहते हैं, तो यह टूल बताता है कि पुराने टैक्स रिजीम में उस HRA का कितना हिस्सा छूट पा सकता है और कितना टैक्सेबल रहता है। हिसाब Rule 279 की तीन सीमाओं से होता है। नए रिजीम (डिफ़ॉल्ट) में यह छूट नहीं मिलती; टूल वह फ़र्क़ भी दिखाता है।
HRA छूट कैलकुलेटर
नया रिजीम (धारा 202) अपने-आप लागू होता है; पुराना रिजीम तभी, जब आपने धारा 202(4) के तहत उससे बाहर निकलना चुना हो।
50% वाले शहर: मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु। नौकरी और किराये का घर अलग-अलग शहरों में हों, तो नीचे "मान्यताएँ" देखें।
सैलरी स्लिप की बेसिक। ₹1 से ₹100 करोड़ महीना तक।
सिर्फ़ वह महँगाई भत्ता (DA) जिसे नौकरी की शर्तें सैलरी का हिस्सा मानती हैं। बाक़ी भत्ते, बोनस और पर्क्विज़िट यहाँ न जोड़ें।
जो किराया आपने सच में चुकाया। बिजली, मेंटेनेंस या डिपॉज़िट अलग हो, तो न जोड़ें।
1 से 12। इन सभी महीनों में बेसिक, DA, HRA और किराया एक जैसे माने जाते हैं।
HRA में से टैक्स-फ़्री हिस्सा
इस हिसाब की मान्यताएँ और सीमाएँ
- सिर्फ़ टैक्स ईयर 2026-27 का नियम (Income-tax Act 2025 और Rules 2026) लगाया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 तक का पुराना नियम (Rule 2A) अलग था — वहाँ 50% सिर्फ़ मुंबई, कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई के लिए था।
- चुने गए सभी महीनों में बेसिक, DA, HRA और किराया एक जैसे माने गए हैं; टूल बदलती रकम को अपने-आप नहीं बाँटता। साल के बीच मकान या शहर बदला हो, तो हर मकान में रहने की अवधि का हिसाब अलग करके जोड़ें। एक ही घर में रहते हुए वेतन या किराया बदला हो, तो पूरी अवधि एक साथ गिनने और हिस्सों में गिनने से नतीजा थोड़ा अलग आ सकता है — आपका एम्प्लॉयर कौन-सा तरीका अपनाता है, उनसे पूछें।
- शहर: Rule 279 की तीसरी सीमा का पाठ उस जगह की बात करता है जहाँ आप नौकरी करते हैं, जबकि उसी नियम की तालिका के कॉलम का शीर्षक "किराये के मकान की जगह" है। ज़्यादातर लोगों के लिए दोनों एक ही शहर होते हैं। अगर अलग हों (जैसे नौकरी बेंगलुरु में और घर उसके बाहर किसी शहर में), तो 50% या 40% में से कौन-सा लगेगा, यह टूल तय नहीं करता — अपने एम्प्लॉयर या किसी योग्य टैक्स सलाहकार से पूछें।
- "सैलरी" = बेसिक + वह DA जिसे नौकरी की शर्तें गिनती हैं। बाक़ी सभी भत्ते और पर्क्विज़िट बाहर हैं। कमीशन जैसी चीज़ें गिनी जाएँगी या नहीं, यह इस टूल में तय नहीं होता; अपने एम्प्लॉयर या टैक्स सलाहकार से पूछें।
- नतीजा छूट की रकम है, बचा हुआ टैक्स नहीं। टैक्स पर असर आपके स्लैब, रिबेट और सेस से तय होता है।
- रसीद, रेंट एग्रीमेंट या मकान-मालिक की जानकारी जैसे काग़ज़ आपका एम्प्लॉयर और नियम माँग सकते हैं। यह टूल उनकी जाँच नहीं करता।
यह टूल किसके लिए है
उन नौकरीपेशा लोगों के लिए जिन्हें सैलरी में HRA मिलता है और जो किराये के मकान में रहते हैं — ख़ासकर तब, जब आप टैक्स ईयर 2026-27 के लिए पुराने और नए रिजीम में से चुनना चाहते हैं, या एम्प्लॉयर को किराये की जानकारी देने से पहले अंदाज़ा लगाना चाहते हैं। अपने घर में रहते हैं और किराया नहीं देते, तो यह छूट नहीं बनती।
हर ख़ाने का मतलब
| ख़ाना | मतलब | इकाई और सीमा |
|---|---|---|
| रिजीम | पुराने रिजीम में छूट तीनों सीमाओं से निकलती है; नए रिजीम में शून्य। | पुराना / नया |
| शहर | जिस शहर में आप काम करते हैं और किराये पर रहते हैं; तीसरी सीमा 50% या 40% इसी से तय होती है। | 8 बड़े शहर / बाक़ी |
| बेसिक | सैलरी स्लिप की बेसिक, एक महीने की। | ₹, 0 से ज़्यादा |
| DA | सिर्फ़ वह DA जो नौकरी की शर्तों के हिसाब से सैलरी में गिना जाता है। | ₹ महीना, ख़ाली = 0 |
| मिला HRA | सैलरी स्लिप में HRA, एक महीने का। | ₹ महीना, 0 या ज़्यादा |
| किराया | हर महीने चुकाया गया किराया। | ₹ महीना, 0 या ज़्यादा |
| महीने | टैक्स ईयर में जितने महीने इस घर में रहे (Rule 279 की "relevant period")। | 1–12, पूरे महीने |
हिसाब कैसे होता है
चुनी गई अवधि की कुल रकम पर तीन सीमाएँ निकाली जाती हैं; इनमें जो सबसे कम है, वही छूट है:
- (क) उस अवधि में असल में मिला HRA।
- (ख) उस अवधि का किराया − उसी अवधि की सैलरी का 10%। किराया 10% से कम या बराबर हो, तो यह सीमा शून्य है।
- (ग) उस अवधि की सैलरी का 50% (ऊपर के 8 शहर) या 40% (बाक़ी जगह)।
टैक्सेबल HRA = मिला HRA − छूट। नए रिजीम में छूट शून्य, इसलिए पूरा HRA टैक्सेबल रहता है।
एक हल किया हुआ उदाहरण
मुंबई में नौकरी करने और वहीं किराये पर रहने वाली एक कर्मचारी: बेसिक ₹50,000 महीना, DA नहीं, HRA ₹20,000 महीना, किराया ₹18,000 महीना, पूरे 12 महीने, पुराना रिजीम।
- साल की सैलरी ₹6,00,000, मिला HRA ₹2,40,000, किराया ₹2,16,000।
- (क) मिला HRA = ₹2,40,000
- (ख) ₹2,16,000 − सैलरी का 10% (₹60,000) = ₹1,56,000
- (ग) सैलरी का 50% = ₹3,00,000
सबसे कम (ख) है, इसलिए छूट ₹1,56,000 (लगभग ₹13,000 महीना) और टैक्सेबल HRA ₹84,000। नए रिजीम में इसी व्यक्ति की छूट ₹0 होगी और पूरा ₹2,40,000 टैक्सेबल। यही कर्मचारी किसी छोटे शहर में होती, तब भी छूट ₹1,56,000 रहती — क्योंकि यहाँ किराये वाली सीमा सबसे कम है, शहर वाली (₹2,40,000) नहीं।
नतीजा कैसे पढ़ें
- कौन-सी सीमा लगी: नतीजे में सबसे कम सीमा पर निशान है। अगर (ख) लगी है, तो किराया बढ़ने पर छूट बढ़ती है — लेकिन सिर्फ़ उस किराये तक जहाँ (ख) बाक़ी दोनों के बराबर हो जाए। ऊपर के उदाहरण में वह किराया लगभग ₹25,000 महीना है; उससे ज़्यादा किराये पर छूट नहीं बढ़ती।
- छूट ≠ बचत: ₹1,56,000 की छूट का मतलब है कि इतनी आय पर टैक्स नहीं लगेगा। "इस छूट के साथ टैक्स देखें" बटन यह रकम (रुपये में, नीचे गोल करके) इनकम टैक्स कैलकुलेटर के HRA ख़ाने में भरता है — इसी टैब में, URL में कुछ डाले बिना; वहाँ अपनी सैलरी और बाक़ी कटौतियाँ भरें। असली बचत आपके स्लैब पर निर्भर है, और नए रिजीम की कम दरों से तुलना करनी पड़ती है — इसके लिए पुराना बनाम नया रिजीम गाइड और इनकम टैक्स कैलकुलेटर देखें।
- क्या शामिल नहीं: होम लोन ब्याज, किराये की आमदनी, एम्प्लॉयर की तरफ़ से दिया गया मकान (पर्क्विज़िट) और दूसरी कटौतियाँ इस टूल में नहीं हैं।
आम ग़लतियाँ
- पूरी CTC या ग्रॉस सैलरी को "सैलरी" मान लेना। 10% और 50%/40% की सीमा बेसिक + गिना जाने वाला DA पर लगती है; बाक़ी भत्ते इसमें नहीं जुड़ते।
- 12 महीने मान लेना, जबकि कुछ ही महीने किराये पर रहे। जितने महीने किराये के घर में रहे, सिर्फ़ उतने का HRA और किराया गिनें।
- नए रिजीम में भी HRA छूट गिन लेना। टैक्स ईयर 2026-27 में धारा 202 वाले नए रिजीम में यह छूट नहीं मिलती।
- पुराने साल का शहर-नियम लगाना। हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु में 50% की सीमा टैक्स ईयर 2026-27 के Rule 279 से है; वित्त वर्ष 2025-26 तक वहाँ 40% थी।
- छूट को बचा हुआ टैक्स समझ लेना। ऊपर "नतीजा कैसे पढ़ें" देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
किराया सैलरी के 10% से कम है, तो क्या कुछ छूट मिलेगी?
नहीं। (ख) वाली सीमा तब शून्य होती है, और तीनों में सबसे कम वही है। उदाहरण: ₹50,000 बेसिक पर 10% = ₹5,000 महीना; ₹4,500 किराये पर छूट ₹0।
मैं साल के बीच में किराये के घर में आया। क्या करूँ?
"महीने" में सिर्फ़ उतने महीने लिखें जितने किराये के घर में रहे। ऊपर वाले उदाहरण में 7 महीने पर मिला HRA ₹1,40,000 और छूट ₹91,000 बनती है। उन महीनों में किराया या वेतन बदला हो, तो ऊपर "मान्यताएँ" में लिखी सीमा देखें।
पति-पत्नी या माता-पिता को किराया देता हूँ, तो?
यह टूल सिर्फ़ रकम का हिसाब करता है; किसे किराया दिया, उसकी शर्तें और काग़ज़ नहीं जाँचता। ऐसे मामलों में अपने एम्प्लॉयर की माँगी जानकारी और किसी योग्य टैक्स सलाहकार की राय लें।
क्या यह मेरी रिटर्न या Form 130 से मेल खाएगा?
अगर आपकी सैलरी, HRA और किराया पूरे समय एक जैसे रहे और एम्प्लॉयर ने यही आँकड़े लिए, तो छूट मेल खानी चाहिए। फ़र्क़ आए तो एम्प्लॉयर से उनका हिसाब माँगें। रिटर्न में अंतिम आँकड़े ही मान्य हैं।
स्रोत और जाँच
नीचे वे स्रोत हैं जिन्हें इस पेज के नियमों/दरों के लिए खोलकर मिलाया गया। "जाँचा" तारीख़ वह दिन है जब स्रोत खोला गया; पेज की "अपडेट" तारीख़ अलग है।
- Income-tax Rules 2026, Rule 279 (HRA छूट की सीमा) — टैक्स ईयर 2026-27 से: मिला HRA, किराया − सैलरी का 10%, और सैलरी का 50% (मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, बेंगलुरु) या 40% (बाक़ी जगह) — इनमें सबसे कम; 'सैलरी' में DA (अगर नौकरी की शर्तों में हो) शामिल, बाक़ी भत्ते और पर्क्विज़िट नहीं; अवधि = जितने समय मकान में रहे; Rule का शीर्षक: 'Limits for the purposes of Schedule III [Table: Sl. No. 11]'। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 11 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 202 (नया टैक्स रिजीम, स्लैब) — नए रिजीम के स्लैब; धारा 202(4) से बाहर निकलने का विकल्प (बिना कारोबार वाली आय पर रिटर्न के साथ); धारा 202(2)(a)(i): नए रिजीम में Schedule III (Table: Sl. No. 5, 6, 7, 8, 11, 17) की छूट नहीं — Sl. No. 11 HRA वाला क्रम है, यह Rule 279 के शीर्षक से मिलाया गया। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 11 अक्टूबर 2026
- Income-tax Rules 1962, Rule 2A (पुराने एक्ट में HRA की सीमा) — वित्त वर्ष 2025-26 तक: 50% सिर्फ़ 'Bombay, Calcutta, Delhi or Madras' में, बाक़ी जगह 40% (two-fifth); 'सैलरी' की परिभाषा Fourth Schedule से ली गई है, जो इस जाँच में नहीं खोली गई। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 11 अक्टूबर 2026