HRA छूट कैलकुलेटर: किराये पर कितना HRA टैक्स-फ़्री होगा?

पेज अपडेट: 11 अक्टूबर 2026 · नियम: टैक्स ईयर 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से), Income-tax Rules 2026 का Rule 279 · स्रोत जाँचे: 11 अक्टूबर 2026

अगर आपकी सैलरी में HRA (मकान किराया भत्ता) मिलता है और आप किराये के घर में रहते हैं, तो यह टूल बताता है कि पुराने टैक्स रिजीम में उस HRA का कितना हिस्सा छूट पा सकता है और कितना टैक्सेबल रहता है। हिसाब Rule 279 की तीन सीमाओं से होता है। नए रिजीम (डिफ़ॉल्ट) में यह छूट नहीं मिलती; टूल वह फ़र्क़ भी दिखाता है।

उदाहरण भरें:

HRA छूट कैलकुलेटर

टैक्स रिजीम (टैक्स ईयर 2026-27)

नया रिजीम (धारा 202) अपने-आप लागू होता है; पुराना रिजीम तभी, जब आपने धारा 202(4) के तहत उससे बाहर निकलना चुना हो।

आप किस शहर में काम करते हैं और किराये पर रहते हैं?

50% वाले शहर: मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु। नौकरी और किराये का घर अलग-अलग शहरों में हों, तो नीचे "मान्यताएँ" देखें।

सैलरी स्लिप की बेसिक। ₹1 से ₹100 करोड़ महीना तक।

सिर्फ़ वह महँगाई भत्ता (DA) जिसे नौकरी की शर्तें सैलरी का हिस्सा मानती हैं। बाक़ी भत्ते, बोनस और पर्क्विज़िट यहाँ न जोड़ें।

जो किराया आपने सच में चुकाया। बिजली, मेंटेनेंस या डिपॉज़िट अलग हो, तो न जोड़ें।

1 से 12। इन सभी महीनों में बेसिक, DA, HRA और किराया एक जैसे माने जाते हैं।

अनुमान

HRA में से टैक्स-फ़्री हिस्सा

(क) मिला HRA
(ख) किराया − सैलरी का 10%
(ग) सैलरी का 50%
टैक्सेबल HRA

इस छूट के साथ टैक्स देखें

यह टूल किसके लिए है

उन नौकरीपेशा लोगों के लिए जिन्हें सैलरी में HRA मिलता है और जो किराये के मकान में रहते हैं — ख़ासकर तब, जब आप टैक्स ईयर 2026-27 के लिए पुराने और नए रिजीम में से चुनना चाहते हैं, या एम्प्लॉयर को किराये की जानकारी देने से पहले अंदाज़ा लगाना चाहते हैं। अपने घर में रहते हैं और किराया नहीं देते, तो यह छूट नहीं बनती।

हर ख़ाने का मतलब

इनपुट, उनकी इकाई और सीमा
ख़ानामतलबइकाई और सीमा
रिजीमपुराने रिजीम में छूट तीनों सीमाओं से निकलती है; नए रिजीम में शून्य।पुराना / नया
शहरजिस शहर में आप काम करते हैं और किराये पर रहते हैं; तीसरी सीमा 50% या 40% इसी से तय होती है।8 बड़े शहर / बाक़ी
बेसिकसैलरी स्लिप की बेसिक, एक महीने की।₹, 0 से ज़्यादा
DAसिर्फ़ वह DA जो नौकरी की शर्तों के हिसाब से सैलरी में गिना जाता है।₹ महीना, ख़ाली = 0
मिला HRAसैलरी स्लिप में HRA, एक महीने का।₹ महीना, 0 या ज़्यादा
किरायाहर महीने चुकाया गया किराया।₹ महीना, 0 या ज़्यादा
महीनेटैक्स ईयर में जितने महीने इस घर में रहे (Rule 279 की "relevant period")।1–12, पूरे महीने

हिसाब कैसे होता है

चुनी गई अवधि की कुल रकम पर तीन सीमाएँ निकाली जाती हैं; इनमें जो सबसे कम है, वही छूट है:

  1. (क) उस अवधि में असल में मिला HRA।
  2. (ख) उस अवधि का किराया − उसी अवधि की सैलरी का 10%। किराया 10% से कम या बराबर हो, तो यह सीमा शून्य है।
  3. (ग) उस अवधि की सैलरी का 50% (ऊपर के 8 शहर) या 40% (बाक़ी जगह)।

टैक्सेबल HRA = मिला HRA − छूट। नए रिजीम में छूट शून्य, इसलिए पूरा HRA टैक्सेबल रहता है।

एक हल किया हुआ उदाहरण

मुंबई में नौकरी करने और वहीं किराये पर रहने वाली एक कर्मचारी: बेसिक ₹50,000 महीना, DA नहीं, HRA ₹20,000 महीना, किराया ₹18,000 महीना, पूरे 12 महीने, पुराना रिजीम।

सबसे कम (ख) है, इसलिए छूट ₹1,56,000 (लगभग ₹13,000 महीना) और टैक्सेबल HRA ₹84,000। नए रिजीम में इसी व्यक्ति की छूट ₹0 होगी और पूरा ₹2,40,000 टैक्सेबल। यही कर्मचारी किसी छोटे शहर में होती, तब भी छूट ₹1,56,000 रहती — क्योंकि यहाँ किराये वाली सीमा सबसे कम है, शहर वाली (₹2,40,000) नहीं।

नतीजा कैसे पढ़ें

आम ग़लतियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

किराया सैलरी के 10% से कम है, तो क्या कुछ छूट मिलेगी?

नहीं। (ख) वाली सीमा तब शून्य होती है, और तीनों में सबसे कम वही है। उदाहरण: ₹50,000 बेसिक पर 10% = ₹5,000 महीना; ₹4,500 किराये पर छूट ₹0।

मैं साल के बीच में किराये के घर में आया। क्या करूँ?

"महीने" में सिर्फ़ उतने महीने लिखें जितने किराये के घर में रहे। ऊपर वाले उदाहरण में 7 महीने पर मिला HRA ₹1,40,000 और छूट ₹91,000 बनती है। उन महीनों में किराया या वेतन बदला हो, तो ऊपर "मान्यताएँ" में लिखी सीमा देखें।

पति-पत्नी या माता-पिता को किराया देता हूँ, तो?

यह टूल सिर्फ़ रकम का हिसाब करता है; किसे किराया दिया, उसकी शर्तें और काग़ज़ नहीं जाँचता। ऐसे मामलों में अपने एम्प्लॉयर की माँगी जानकारी और किसी योग्य टैक्स सलाहकार की राय लें।

क्या यह मेरी रिटर्न या Form 130 से मेल खाएगा?

अगर आपकी सैलरी, HRA और किराया पूरे समय एक जैसे रहे और एम्प्लॉयर ने यही आँकड़े लिए, तो छूट मेल खानी चाहिए। फ़र्क़ आए तो एम्प्लॉयर से उनका हिसाब माँगें। रिटर्न में अंतिम आँकड़े ही मान्य हैं।

लेखक: start। SaralPaisa कोई वित्तीय सलाहकार, CA या SEBI-रजिस्टर्ड संस्था नहीं है; यह पेज शिक्षा के लिए है। हमारे बारे में · हम हिसाब कैसे करते हैं · डिस्क्लेमर