होम लोन अफ़ोर्डेबिलिटी: आपकी आय से कितना लोन चुक सकता है?
घर देखने से पहले यह जानना काम आता है कि आपकी हर महीने की आय में से कितनी EMI आराम से चुक सकती है। आप तय करते हैं कि आय का कितना हिस्सा सभी EMI में जाए; टूल उसमें से चल रही EMI घटाकर नई EMI की जगह निकालता है, और बताता है कि उस EMI से चुनी दर और अवधि पर लगभग कितना मूलधन चुक सकता है।
होम लोन अफ़ोर्डेबिलिटी कैलकुलेटर
टैक्स और PF कटने के बाद जो खाते में आता है। साथ में लोन लेने वाले की आय जोड़नी हो, तो कुल लिखें।
कार, पर्सनल, एजुकेशन लोन या कोई दूसरी तय मासिक देनदारी।
1% से 80% तक। यह आपकी अपनी चुनी सीमा है — कोई सरकारी या सभी बैंकों का एक नियम नहीं। घर के बाक़ी ख़र्च और बचत देखकर तय करें।
0% से 30% तक, पूरी अवधि स्थिर मानी गई। बैंक के मौजूदा ऑफ़र से भरें।
1 से 40 साल तक, पूरे साल। बैंक आपकी उम्र और नीति से अधिकतम अवधि तय करता है।
इस EMI से लगभग इतना मूलधन चुक सकता है
यह अंदाज़ा क्या है और क्या नहीं
- यह बैंक की पात्रता, ऑफ़र या मंज़ूरी नहीं है। बैंक क्रेडिट स्कोर और रिकॉर्ड, उम्र और रिटायरमेंट तक के साल, नौकरी या कारोबार की स्थिरता, प्रॉपर्टी का मूल्यांकन और उसके मुक़ाबले लोन की सीमा, अपने आय-अनुपात नियम और दूसरे दस्तावेज़ देखकर फ़ैसला करता है।
- डाउन पेमेंट, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग फ़ीस, बीमा और GST शामिल नहीं हैं। घर की कुल क़ीमत लोन से ज़्यादा होगी।
- ब्याज दर पूरी अवधि स्थिर मानी गई है और हर महीने बाक़ी मूलधन पर (सालाना दर ÷ 12) लगती है — वही गणित जो EMI कैलकुलेटर में है। फ़्लोटिंग दर बदलने पर EMI या अवधि बदलती है।
- आय और चल रही EMI पूरी अवधि एक जैसी मानी गई हैं। आय घटने या नई ज़िम्मेदारी आने का असर इसमें नहीं है।
यह टूल किस काम का है
घर ढूँढने या बैंक जाने से पहले अपनी सीमा समझने के लिए। यह उल्टी दिशा से हिसाब करता है: आप EMI तय करते हैं, टूल मूलधन बताता है। बैंक के बताए लोन से इसकी तुलना करके आप देख सकते हैं कि ऑफ़र आपके बजट से ज़्यादा तो नहीं।
हर ख़ाने का मतलब
| ख़ाना | मतलब | इकाई और सीमा |
|---|---|---|
| आय | हर महीने हाथ में आने वाली रकम (टैक्स, PF कटने के बाद)। | ₹ महीना, 0 से ज़्यादा |
| चल रही EMI | सभी मौजूदा लोन की किस्तें और तय मासिक देनदारियाँ। | ₹ महीना, ख़ाली = 0 |
| EMI की सीमा | आय का वह हिस्सा जो आप सभी EMI पर ख़र्च करने को तैयार हैं। | 1%–80% |
| दर | बैंक की बताई सालाना नाममात्र दर; पूरी अवधि स्थिर। | 0%–30% |
| अवधि | लोन कितने साल चलेगा। | 1–40 साल |
हिसाब कैसे होता है
नई EMI की जगह = आय × सीमा% − चल रही EMI
मूलधन ≈ EMI × [1 − (1 + r)−n] ÷ r
r = मासिक दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100), n = अवधि × 12 महीने। दर 0% हो तो मूलधन = EMI × n। अगर नई EMI की जगह शून्य या उससे कम बचे, तो टूल कोई लोन नहीं दिखाता — सिर्फ़ यह कि सीमा से कितनी ज़्यादा EMI पहले से चल रही है। नतीजा कभी नकारात्मक नहीं होता।
एक हल किया हुआ उदाहरण
हाथ में आय ₹1,00,000 महीना, पहले से कार लोन की EMI ₹10,000, सीमा 40%, दर 8.5%, अवधि 20 साल:
- सभी EMI की सीमा: ₹1,00,000 × 40% = ₹40,000
- नई EMI की जगह: ₹40,000 − ₹10,000 = ₹30,000
- इस EMI से 240 महीनों में लगभग ₹34.57 लाख (₹34,56,925) मूलधन चुकता है; पूरी अवधि में ब्याज लगभग ₹37,43,075।
कार लोन न होता, तो जगह ₹40,000 होती और लगभग ₹46.09 लाख — यानी ₹10,000 की चल रही EMI ने अंदाज़े को लगभग ₹11.52 लाख घटाया। दर 1% ज़्यादा (9.5%) होने पर यही EMI लगभग ₹32.18 लाख ही चुका पाती। अवधि 25 साल करने पर मूलधन लगभग ₹37.26 लाख होता है, पर ब्याज लगभग ₹15,31,268 बढ़ जाता है।
नतीजा कैसे पढ़ें
- यह ऊपरी सीमा है, लक्ष्य नहीं। इतना लोन लेना ज़रूरी नहीं; कम लोन से EMI के बाद बचत और इमरजेंसी फ़ंड की जगह बचती है।
- "इस रकम का पूरा EMI शेड्यूल" बटन मूलधन को ₹1,000 तक नीचे गोल करके (उदाहरण में ₹34,56,000), दर और अवधि के साथ EMI कैलकुलेटर में भरता है — इसी टैब में, एक बार, URL में कोई रकम डाले बिना।
- बैंक का ऑफ़र इससे ज़्यादा हो सकता है, कम भी। कम हो तो वजह बैंक से पूछें; ज़्यादा हो तो अपने बजट को ही आधार रखें।
आम ग़लतियाँ
- CTC या ग्रॉस सैलरी से हिसाब। EMI हाथ में आने वाली रकम से चुकती है।
- चल रही EMI भूल जाना। हर ₹1,000 की मौजूदा EMI नई EMI की जगह उतनी ही घटाती है।
- सिर्फ़ लोन को घर की क़ीमत मान लेना। डाउन पेमेंट, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और फ़ीस अलग से चाहिए।
- सबसे लंबी अवधि को "सस्ता" समझना। लंबी अवधि से EMI घटती है पर कुल ब्याज बहुत बढ़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बैंक कितना लोन देगा, यह टूल क्यों नहीं बताता?
क्योंकि वह फ़ैसला बैंक के अपने नियम, आपके क्रेडिट रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी पर टिका है, जो किसी सार्वजनिक फ़ॉर्मूले से नहीं निकलता। विस्तार से: अपना अंदाज़ा बनाम बैंक की पात्रता।
सीमा के लिए कौन-सा प्रतिशत सही है?
कोई एक सही संख्या नहीं है। अपना मासिक बजट बनाकर देखें कि ज़रूरी ख़र्च, बचत और इमरजेंसी फ़ंड के बाद कितना बचता है; सीमा उसी से तय करें।
0% ब्याज पर क्या होता है?
तब मूलधन = EMI × महीने। उदाहरण: ₹50,000 आय, 30% सीमा, कोई चल रही EMI नहीं, 5 साल → ₹9,00,000।
क्या यह मेरी आय या रकम कहीं भेजता है?
यह टूल नहीं भेजता। हिसाब आपके ब्राउज़र में होता है। EMI टूल तक रकम इसी टैब की sessionStorage से एक बार जाती है और वहाँ पढ़ते ही मिटा दी जाती है; URL में कुछ नहीं जाता। इसी पेज के अंत में Adsterra का विज्ञापन भी दिखता है, जिसकी स्क्रिप्ट उनके सर्वर से आती है; उसके बारे में प्राइवेसी पॉलिसी देखें।
स्रोत और जाँच
नीचे वे स्रोत हैं जिन्हें इस पेज के नियमों/दरों के लिए खोलकर मिलाया गया। "जाँचा" तारीख़ वह दिन है जब स्रोत खोला गया; पेज की "अपडेट" तारीख़ अलग है।
- RBI: Key Facts Statement (KFS) for Loans & Advances (RBI/2024-25/18, 15 अप्रैल 2024) — APR = ब्याज दर और बाक़ी सभी चार्ज मिलाकर क़र्ज़ की सालाना लागत; KFS में न लिखी फ़ीस बिना स्पष्ट सहमति के नहीं ली जा सकती; क्रेडिट कार्ड इस सर्कुलर से बाहर; 1 अक्टूबर 2024 या बाद में मंज़ूर रिटेल/MSME टर्म लोन। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 11 अक्टूबर 2026
- RBI (Pre-payment Charges on Loans) Directions, 2025 (RBI/2025-26/64, 2 जुलाई 2025) — 1 जनवरी 2026 या बाद में मंज़ूर/रिन्यू हुए, व्यक्तियों को ग़ैर-व्यावसायिक काम के लिए दिए फ़्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं (पैरा 5(i)); कोई लॉक-इन नहीं (5(iii)); बाक़ी मामलों में लेंडर की मंज़ूर पॉलिसी (6); चार्ज लगेगा या नहीं, यह सैंक्शन लेटर, एग्रीमेंट और KFS में लिखा होना चाहिए (9)। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 11 अक्टूबर 2026