HRA छूट कैसे निकलती है? सैलरी, किराया, शहर और रिजीम

पेज अपडेट: 11 अक्टूबर 2026 · नियम: टैक्स ईयर 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से) · स्रोत जाँचे: 11 अक्टूबर 2026

HRA (मकान किराया भत्ता) सैलरी का हिस्सा है। किराये के घर में रहने वाले कर्मचारी को उसका कुछ हिस्सा टैक्स से छूट मिल सकता है — लेकिन सिर्फ़ पुराने रिजीम में, और सिर्फ़ तीन सीमाओं में से सबसे छोटी तक। यह गाइड टैक्स ईयर 2026-27 के नियम (Income-tax Rules 2026 का Rule 279) को उदाहरण के साथ समझाती है।

तीन सीमाएँ, और सबसे कम वाली

Rule 279 के अनुसार, जिस अवधि में आप किराये के मकान में रहे, उस अवधि के लिए ये तीन रकमें निकाली जाती हैं:

  1. (क) मिला HRA — उस अवधि में सैलरी के साथ असल में मिला भत्ता।
  2. (ख) किराया − सैलरी का 10% — उस अवधि में चुकाया किराया, उसी अवधि की सैलरी के दसवें हिस्से से जितना ज़्यादा है।
  3. (ग) सैलरी का 50% या 40% — नीचे बताए 8 शहरों में 50%, बाक़ी जगह 40% (शहर किसे माना जाए, यह "शहर" वाले हिस्से में है)।

इनमें सबसे कम रकम पर टैक्स नहीं लगता; बाक़ी HRA आपकी सैलरी की आय में जुड़कर टैक्सेबल रहता है। इसका एक सीधा नतीजा: अगर किराया सैलरी के 10% से ज़्यादा नहीं है, तो (ख) शून्य है और छूट भी शून्य।

HRA के लिए "सैलरी" का मतलब

Rule 279 में "सैलरी" में महँगाई भत्ता (DA) तभी शामिल है जब नौकरी की शर्तें ऐसा कहती हों, और बाक़ी सभी भत्ते और पर्क्विज़िट बाहर हैं। इसलिए CTC या ग्रॉस सैलरी से 10% या 50% निकालना ग़लत है — आम तौर पर यह बेसिक (और गिना जाने वाला DA) ही होगा। आपकी सैलरी स्लिप में कोई और हिस्सा है जिसके बारे में शक हो, तो एम्प्लॉयर से पूछें कि HRA के हिसाब में वे क्या गिनते हैं।

अवधि: पूरा साल नहीं, जितने समय किराये पर रहे

Rule 279 "relevant period" को वह अवधि बताता है जब टैक्स ईयर में आप उस मकान में रहे। अप्रैल से अक्टूबर तक माता-पिता के घर रहे और नवंबर से किराये पर, तो सिर्फ़ नवंबर–मार्च के HRA, किराये और सैलरी पर हिसाब होगा।

साल के बीच मकान या शहर बदला, तो हर मकान की अवधि अलग गिनें। एक ही घर में रहते हुए वेतन या किराया बदला, तो पूरी अवधि को एक साथ गिनने और महीनों के हिस्सों में गिनने से नतीजा थोड़ा अलग आ सकता है; एम्प्लॉयर का तरीका पूछ लें। HRA कैलकुलेटर एक बार में एक जैसी मासिक रकम वाली अवधि लेता है।

शहर: टैक्स ईयर 2026-27 से 8 शहरों में 50%

Rule 279 में 50% वाली सीमा मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु के लिए है; बाक़ी हर जगह 40%। पुराने नियम (1962 के Rules का Rule 2A) में 50% सिर्फ़ मुंबई, कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई के लिए था, और वहाँ शहर किराये के मकान की जगह से तय होता था। इसलिए वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) की रिटर्न में हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद या बेंगलुरु के लिए 40% ही लगेगा — 50% नहीं।

शहर किसे मानें: Rule 279 की तीसरी सीमा का पाठ उस जगह की बात करता है जहाँ कर्मचारी नौकरी करता है ("employed in the location"), जबकि उसकी तालिका के कॉलम का शीर्षक "Location of residential accommodation" (किराये के मकान की जगह) है। ज़्यादातर लोग जिस शहर में नौकरी करते हैं, वहीं किराये पर रहते हैं, तो फ़र्क़ नहीं पड़ता। दोनों शहर अलग हों और उनमें से सिर्फ़ एक 8 की सूची में हो, तो इस गाइड से कोई एक प्रतिशत पक्का न मानें — एम्प्लॉयर या किसी योग्य टैक्स सलाहकार से पूछें।

नया या पुराना रिजीम

टैक्स ईयर 2026-27 में Income-tax Act 2025 की धारा 202 वाला नया रिजीम डिफ़ॉल्ट है, और धारा 202(2)(a)(i) उसमें HRA छूट (Schedule III का क्रम 11) बंद करती है। छूट तभी मिलेगी जब आप धारा 202(4) के तहत नए रिजीम से बाहर निकलकर पुराना रिजीम चुनें।

पुराना रिजीम चुनने का फ़ैसला सिर्फ़ HRA से नहीं होता: नए रिजीम की दरें, स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट अलग हैं, और पुराने रिजीम की दूसरी कटौतियाँ भी गिनती में आती हैं। पूरी तुलना के लिए पुराना बनाम नया रिजीम गाइड और इनकम टैक्स कैलकुलेटर देखें; HRA की छूट को कैलकुलेटर में पुराने रिजीम की कटौतियों के साथ डालें।

हल किया हुआ उदाहरण (छोटा शहर)

उदाहरण — Rule 279, पुराना रिजीम, 12 महीने

लखनऊ जैसे किसी शहर में (जो 8 की सूची में नहीं है): बेसिक ₹30,000 महीना, DA नहीं, HRA ₹12,000 महीना, किराया ₹14,000 महीना।

  • (क) मिला HRA: ₹1,44,000
  • (ख) किराया ₹1,68,000 − सैलरी ₹3,60,000 का 10% = ₹1,32,000
  • (ग) सैलरी का 40% = ₹1,44,000

सबसे कम (ख) है: छूट ₹1,32,000, टैक्सेबल HRA ₹12,000। नए रिजीम में छूट शून्य होती और पूरा ₹1,44,000 टैक्सेबल रहता।

मुंबई वाले उदाहरण के लिए (₹50,000 बेसिक, ₹20,000 HRA, ₹18,000 किराया) छूट ₹1,56,000 बनती है — पूरा हिसाब HRA कैलकुलेटर के पेज पर है।

काग़ज़ और एम्प्लॉयर

साल के दौरान आपका एम्प्लॉयर TDS काटते समय HRA छूट तभी गिनता है जब आप उसे किराये की जानकारी दें। इसके लिए किराये की रसीद, एग्रीमेंट या मकान-मालिक की जानकारी जैसे काग़ज़ माँगे जा सकते हैं; कौन-से और किस फ़ॉर्म में, यह एम्प्लॉयर और लागू नियम बताएँगे। SaralPaisa ये जानकारी नहीं माँगता और कहीं जमा नहीं करता।

आम ग़लतियाँ

लेखक: start। SaralPaisa कोई वित्तीय सलाहकार, CA या SEBI-रजिस्टर्ड संस्था नहीं है; यह पेज शिक्षा के लिए है। हमारे बारे में · हम हिसाब कैसे करते हैं · डिस्क्लेमर