टैक्स ईयर क्या है? नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 से क्या बदला
सीधा जवाब: 1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act 2025 लागू है और 1961 वाला एक्ट उसी दिन से हट गया है। नए एक्ट में "प्रीवियस ईयर" की जगह टैक्स ईयर है, और "असेसमेंट ईयर" का कॉन्सेप्ट बंद हो गया है। स्लैब और 12 लाख तक की राहत जैसे फ़ायदे बजट से तय होते हैं — वे एक्ट बदलने से अपने आप नहीं बदले। सबसे बड़ा बदलाव धाराओं के नंबरों और फ़ॉर्मों में है।
टैक्स ईयर क्या है?
पुराने क़ानून में एक ही कमाई के लिए दो साल लिखने पड़ते थे: कमाई वाला "प्रीवियस ईयर" (आम बोलचाल में FY) और उसके अगले साल वाला "असेसमेंट ईयर" (AY), जिसमें उसका हिसाब होता था।
आयकर विभाग के Transition FAQ के अनुसार नए एक्ट में टैक्स ईयर का मतलब है "वित्त वर्ष के भीतर के बारह महीने" — यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च। टैक्स ईयर 2026-27 = 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 की कमाई। (अगर कोई कारोबार या आय का नया स्रोत साल के बीच शुरू हो, तो उस साल का टैक्स ईयर छोटा हो सकता है।)
| कमाई की अवधि | पुराना नाम | नया नाम |
|---|---|---|
| 1 अप्रैल 2025 – 31 मार्च 2026 | FY 2025-26 / AY 2026-27 | पुराने क़ानून से ही चलेगा |
| 1 अप्रैल 2026 – 31 मार्च 2027 | — | टैक्स ईयर 2026-27 |
| 1 अप्रैल 2027 – 31 मार्च 2028 | — | टैक्स ईयर 2027-28 |
कौन-सी आय किस क़ानून से चलेगी?
क़ानून इससे तय होता है कि आय कब हुई, न कि रिटर्न कब भरा।
- 31 मार्च 2026 तक की आय (FY 2025-26): 1961 वाले एक्ट और पुराने फ़ॉर्म से — भले ही रिटर्न अप्रैल 2026 के बाद भरा गया हो। उस साल के नोटिस और सुधार भी पुराने क़ानून से चलेंगे।
- 1 अप्रैल 2026 से की आय (टैक्स ईयर 2026-27): नए 2025 एक्ट से।
क्या नहीं बदला
- नए रिजीम के स्लैब: ₹4 लाख तक 0%, फिर 5% से 30% — अब धारा 202(1) में। हर सैलरी पर टैक्स की तालिका।
- 12 लाख तक राहत: धारा 156 (पहले 87A) में ₹60,000 तक का रिबेट और उसके ठीक ऊपर मार्जिनल रिलीफ़। सैलरी वालों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलाकर ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर टैक्स शून्य।
- नया रिजीम डिफ़ॉल्ट: पुराना रिजीम धारा 202(4) के विकल्प से चुना जा सकता है।
- पुराने रिजीम की कटौतियाँ जारी हैं, नए नंबरों पर। जैसे, PPF/ELSS/LIC वाली ₹1.5 लाख की कटौती अब धारा 123 में है।
क्या बदला: धाराएँ और फ़ॉर्म
धाराओं के नंबर
पुराने क़ानून की धारा 192 से 194T तक की TDS धाराएँ नए एक्ट में दो धाराओं में समेटी गई हैं: सैलरी के लिए धारा 392 और बाक़ी भुगतानों के लिए धारा 393 (आयकर विभाग का Transition FAQ)। रिपोर्टों के मुताबिक़ नए एक्ट में पुराने के 800 से ज़्यादा के मुक़ाबले लगभग 536 धाराएँ हैं।
फ़ॉर्मों के नए नंबर
| पुराना | नया | किस काम का | आधिकारिक स्रोत में |
|---|---|---|---|
| Form 16 | Form 130 | एम्प्लॉयर का सैलरी TDS सर्टिफ़िकेट | Form 130 FAQ |
| Form 15G / 15H | Form 121 | कम आय पर ब्याज से TDS न कटवाने की घोषणा — 1 अप्रैल 2026 या बाद शुरू होने वाले टैक्स ईयर के लिए | Transition FAQ |
| वार्षिक सूचना विवरण (AIS) | Form 168 | आपके नाम पर दर्ज लेन-देन/आय का सालाना ब्योरा — टैक्स ईयर 2026-27 से | Transition FAQ |
ध्यान दें: इस पेज के पिछले संस्करण में Form 168 को Form 26AS की जगह बताया गया था। आधिकारिक Transition FAQ इसे AIS की जगह बताता है, इसलिए इसे ठीक किया गया है। पुराने सालों के लिए Form 26AS और AIS वैसे ही रहते हैं।
नौकरीपेशा लोगों के लिए 4 काम
- रिजीम तय करें: साल की शुरुआत में एम्प्लॉयर को बताएँ, ताकि सही TDS कटे। तुलना: इनकम टैक्स कैलकुलेटर और पुराना vs नया रिजीम।
- पुराने रिजीम में हों, तो सबूत संभालें: PPF, ELSS, बीमा प्रीमियम और किराए की रसीदें।
- नए नाम पहचानें: Form 130 (सैलरी TDS), Form 121 (TDS न कटवाने की घोषणा), Form 168 (सालाना ब्योरा)।
- सिर्फ़ आधिकारिक पोर्टल: "नया क़ानून, तुरंत अपडेट करें" जैसे SMS/ईमेल लिंक पर क्लिक न करें; रिटर्न incometax.gov.in पर ही भरें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या नए एक्ट से मेरा टैक्स बढ़ गया?
नहीं। एक्ट बदलने से दरें अपने आप नहीं बदलीं; नए रिजीम के स्लैब धारा 202 में वही हैं, और सैलरी पर स्टैंडर्ड डिडक्शन धारा 19 में ₹75,000 (नया रिजीम) / ₹50,000 (बाक़ी मामले) है।
क्या AY शब्द पूरी तरह ख़त्म हो गया?
नए एक्ट वाले सालों के लिए असेसमेंट ईयर का कॉन्सेप्ट बंद है। FY 2025-26 और उससे पहले के रिटर्न/नोटिस में AY दिखता रहेगा।
80C अब भी मिलता है?
पुराने रिजीम में ₹1.5 लाख तक की वही कटौती, अब धारा 123 के नाम से। नए रिजीम में यह कटौती नहीं मिलती।
स्रोत और जाँच
नीचे वे स्रोत हैं जिन्हें इस पेज के नियमों/दरों के लिए खोलकर मिलाया गया। "जाँचा" तारीख़ वह दिन है जब स्रोत खोला गया; पेज की "अपडेट" तारीख़ अलग है।
- आयकर विभाग: Interplay and Transition FAQs — 1 अप्रैल 2026 से नया एक्ट; FY 2025-26 पुराने एक्ट से; टैक्स ईयर; Form 121; AIS की जगह Form 168। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- आयकर विभाग: Form No. 130 FAQs — Form 130 ने Form 16 की जगह ली। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 202 (नया टैक्स रिजीम, स्लैब) — नए रिजीम के स्लैब; धारा 202(4) से बाहर निकलने का विकल्प (बिना कारोबार वाली आय पर रिटर्न के साथ); धारा 202(2)(a)(i): नए रिजीम में Schedule III (Table: Sl. No. 5, 6, 7, 8, 11, 17) की छूट नहीं — Sl. No. 11 HRA वाला क्रम है, यह Rule 279 के शीर्षक से मिलाया गया। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 11 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 19 (सैलरी से कटौतियाँ) — स्टैंडर्ड डिडक्शन: धारा 202(1) (नया रिजीम) में ₹75,000, बाक़ी मामलों में ₹50,000 — दोनों में सैलरी से ज़्यादा नहीं। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 156 (रिबेट) — ₹12,500 (₹5 लाख तक), नए रिजीम में ₹60,000 (₹12 लाख तक) और मार्जिनल रिलीफ़। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 123 (पहले 80C) — ₹1,50,000 की सीमा; Schedule XV की पूरी सूची इस पेज पर नहीं खुली। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- LiveLaw: बजट 2026-27 में स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं बदले — पुराने रिजीम के स्लैब और बजट 2026-27 में स्लैब/स्टैंडर्ड डिडक्शन अपरिवर्तित रहने की ख़बर — पुराने रिजीम के स्लैब प्राथमिक स्रोत पर अलग से नहीं जाँचे (स्टैंडर्ड डिडक्शन की रकम अब धारा 19 से जाँची गई)। द्वितीयक स्रोत — प्राथमिक पर अलग से नहीं जाँचा जाँचा: 8 अक्टूबर 2026
- Patron Accounting: Income Tax Act 1961 vs 2025 — धाराओं की संख्या (536 बनाम 819) — एक्ट के पाठ से अलग से नहीं गिनी गई। द्वितीयक स्रोत — प्राथमिक पर अलग से नहीं जाँचा जाँचा: 9 अक्टूबर 2026